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IWPC IN THE NEWS
Journalists demand report from govt on killings of mediapersons
Live Mint
Oct 03, 2017
A gathering of journalists on Monday vowed to take up the recent killings of mediapersons in the country with the home ministry and demanded a status report on the attacks against the media in various states...
NDTV
Oct 02 2017
Journalists gathered at the Press Club of India in New Delhi today to protest the recent spate of violence against mediapersons. Reporters and editors from across media channels and newspapers demanded a status report on all pending...
Journalists protest in Delhi condemning attacks on media
Scroll.in
Oct 02, 2017
On the occasion of the birth anniversary of Mahatma Gandhi, several journalists in Delhi on Monday staged protests against the recent spate of violence against the mediaThe protestors formed a human chain to condemn the attack on journalists...
The Telegraph
Ocr 03 2017
Several journalists and a few students, teachers and activists today marked Gandhi Jayanti by forming a human chain around the Press Club of India and later marching to the Indian Women's Press Corps office, demanding action against the...
PCI, IWPC demand time bound action in attack on journalists, urge MHA to provide status reports
United News Of India
Sep 25, 2017
New Delhi, Sept 22 (UNI) Describing the attacks on journalists across the country as 'unacceptable' and 'a worrying trend', the Press Club...
The Asian Age
Sep 23, 2017
Taking suo-motu cognizance of the murder of journalist Santanu Bhowmik in Tripura, the Press Council of India has sought an immediate report on the issue...
The Tribune
Sep 23, 2017
Condemning the brutal murder of Tripura based TV journalist Santanu Bhowmik today, media organizations today resolved to hold a silent protest...
IWPC Statements
IWPC PRESS STATEMENT
English
Joint Statement issued by Press Club of India, Federation of Press Clubs in India, Indian Women's Press Corps, Press Association, Kerala Union of Working Journalists and Indian Journalists Union)
October 2:

Journalists across the country held simultaneous peaceful protests on Gandhi Jayanti against the spate of killings, threats and violence directed at media persons. Silent protests, meetings and human chains were organised in various state capitals and cities under the aegis of press clubs in the country to draw attention to the killings, threats and intimidation of journalists. Senior, junior and mid level journalists from across the mass media joined in large numbers to register their concerns.

Expressing concern at the growing incidents of attacks on sections of the media fraternity across the country - the symbolic protests on October 2 sent out one single message - violence against journalists in any form will not be tolerated in the land that preaches non violence. The peaceful protests drew attention to the increasingly unsafe environment for journalists, the misogynistic and abusive targeting of media persons for their views on online forums, covert and overt threats to physically harm journalists for holding different opinions and increasing intolerance against criticism.

The peaceful protests resolved that journalistic freedoms and the right to dissent need to be protected and the right to freedom of expression needs to be upheld in the interests of our liberal secular democracy.

A memorandum appending the signatures of hundreds of journalists would be submitted to the Union Home Minister requesting his intervention for a status report on attacks against journalists in various states and action taken in that regard.

(Issued by Press Club of India, Federation of Press Clubs in India, Indian Women's Press Corps, Press Association, Kerala Union of Working Journalists and Indian Journalists Union)


 
Members' Corner
अलविदा शांताजी
कला समीक्षक और पत्रकार शांता सरबजीत सिंह ने जीवन के कई रंगों को देखा। उन्होंने पत्रकारिता जगत में उस समय कदम रखा, जब गिनती की महिला पत्रकार काम कर रहीं थीं। उन्होंने अपनी लगन, मेहनत और जिजीविषा के बल पर अपनी पहचान न सिर्फ कला जगत में बनाई, बल्कि,
आम लोगों के बीच •ाी काफी लोकप्रिय रहीं। वह कई सामाजिक व सांस्कृतिक संस्थाओं से संबद्ध रहीं। वह वूमेन प्रेस कॉर्प की •ाी अध्यक्ष रहीं। उन्होंने संगीत नाटक अकादमी के उपाध्यक्ष पद को •ाी सुशो•िात किया। लेकिन, यह प्रकृति का नियम है कि इस संसार में सब कुछ नश्वर है। इंसान •ाी उसका एक हिस्सा है और इसी हिस्से का एक अंश शांता सरबजीत सिंह •ाी थीं। 2 अगस्त 2017 को उन्होेंने इस संसार को अलविदा कह दिया। शांता सरबजीत सिंह की स्मृति में इंडियन वूमेन प्रेस कॉर्प में श्रद्धांजलि स•ाा का आयोजन 9 सितंबर को किया गया। इस स•ाा में कथक नृत्यांगना शोवना नारायण, •ातरनाट्यम नृत्यांगना प्रति•ाा प्रहलाद, कुचिपुडी नर्तक राजा रेड्डी, ओडिशी नृत्यांगना कविता द्विवेदी, कला समीक्षक सुनील कोठारी, पत्रकार मृणाल पांडे, •ाारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के पूर्व निदेशक सुरेश गोयल और कॉर्प के कई सदस्य उपस्थित थे। वरिष्ठ पत्रकार मृणाल पांडे ने हिंदुस्तान में उनके कॉलम लेखन के दिनों को याद किया। मृणाल पांडे ने अपने वक्तव्य में कहा कि वह समय से सब काम करती थीं। उनसे क•ाी किसी की तकरार नहीं होती थीं। वे एक सुलझी हुई शख्सियत थीं। अपने गहन अध्ययन और समझ से वह सब को जोड़ने वाली माला के धागे की तरह थी। पहली अध्यक्ष के तौर पर मृणाल जी ने बताया कि शांता जी के अथक प्रयासों की वजह से वूमेन प्रेस कॉर्प इतनी अच्छी संस्था बन कर उ•ार सका है। वह हमारे क्लब की धुरी थीं। उन्होंने कहा कि शांता जी की प्रेरणा और सुझावों से वूमेन प्रेस क्लब की परिकल्पना बनी। कथक नृत्यांगना शोवना नारायण ने अपने एक कार्यक्रम को याद करते हुए कहा कि मैंने एक बार सरबजीत जी की पेंटिग्स को आधार बना कर कोरियोग्राफी की थी। इसमें शांताजी ने बहुत सहयोग किया था। इस स•ाा को संबोधित करते हुए, कला समीक्षक सुनील कोठारी ने कहा कि मैं जब •ाी दिल्ली आता था, तब उनके घर पर ठहरता था। वह खुले मन की थीं। किसी के प्रति ईर्ष्या •ााव नहीं रखतीं थीं। श्रद्धांजलि स•ाा में शांताजी को याद करते हुए, कुचिपुडी नर्तक राजा रेड्डी ने कहा कि उन्होंने मुझे, मेरी पत्नी और बेटियों को हमेशा प्रोत्साहित किया। आईसीसीआर के पूर्व निदेशक सुरेश गोयल ने कहा कि जब कॉर्प का वार्षिक आयोजन होता था तब शांता जी बहुत मेहनत कर सबको साथ लेकर काम करने की कोशिश में जुट जाती थीं। उनके अनुशासन ,मेहनत और लगन से बहुत कुछ सीखने की प्रेरणा और मार्गदर्शन मिलता है। इस संदर्•ा में •ारतनाट्यम नृत्यांगना प्रति•ाा प्रहलाद ने कहा कि वह तो मेरी मां थीं। उन्होंने मेरा हर कदम पर साथ दिया। जबकि, ओडिशी नृत्यांगना कविता द्विवेदी ने कहा कि उन्होंने मेरे पिताजी व गुरू हरेकृष्ण बेहरा की बहुत मदद की। वह समय की बहुत पाबंद थीं। स•ाा के आरं•ा में इंडियन वूमेन प्रेस कॉर्प की अध्यक्ष शो•ाना जैन ने शांता सरबजीत सिंह को याद करते हुए, कहा कि शांताजी हमारे संस्थान की ऐसा आधार स्तं•ा थी जैसे मानव शरीर के लिए रीढ़ की हड्डी। वह हमेशा क्लब के हर सदस्य और हर कार्यक्रम में दिलचस्पी लेती थीं। उन्होंने कहा कि शांता जी ने एक सफर पूरा कर लिया है और आज हम उनके जीवन की नई यात्रा को मनाने के लिए एकत्रित हुए हैं। उपाध्यक्ष टी राजलक्ष्मी ने कहा कि शांता जी मुझसे उम्र में काफी बड़ी थीं। उनको मैं हमेशा शांता कहती थी। वह हमारे दोस्ताना संबंध से बहुत खुश रहती थीं। पत्रकार सुषमा रामचंद्रन ने कहा कि शांता जी चाहे किसी •ाी संस्थान से जुड़ी रही हो हर गतिविधि में पूरे उत्साह और जोश से •ााग लेतीं थीं। महासचिव अदिति टंडन ने उनसे अपनी पहली मुलाकात को याद किया। अदिति ने कहा कि मै शांताजी से मिलने डलहौजी गई थी। उस समय वहां बहुत ठंड थी। मुझे कंपकंपाते देखकर,उन्होंने एक शॉल लाकर खुद मुझे ओढ़ाया। मुझे उनकी वह संवेदनशीलता क•ाी नहीं •ाूलती। स•ाा के दौरान दिवंगत शांता सरबजीत सिंह के पुत्र करमजीत सिंह व पुत्रवधू और संस्थान में कार्यरत कर्मचारियों और कई सदस्यों ने •ाी उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। इस मौके पर शांता जी के लेखन की कुछ प्रतियों को •ाी दर्शाया गया था। तस्वीर पर चढ़ाए गए फूलों के बीच से मुस्कुराती शांता जी को देख कर लग रहा था मानो सबको को अपना सदा -सा प्यार दे रही हो।
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